जमशेदपुर, फरवरी 20 -- फाल्गुन मास की शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस बार 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी है। मान्यता है कि इस एकादशी पर जो व्रत करते हैं, उन्हें साल में पड़ने वाले 24 एकादशी के बराबर लाभ मिलता है। आमलकी एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने कहा है कि जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए आमलकी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव, माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार अपनी प्रिय काशी नगरी आए थे। वहां आकर शिव ने देवी पार्वती के साथ होली खेली थी। पुण्य नक्षत्र में व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी व्रत पर अमला के पेड़ की पूजा के साथ ही अन्नपूर्णा के दर्शन से विशेष लाभ मिलता है। पुरोहित अरुण त्रिपाठी के बताया कि एकादशी ...