अश्वनी कुमार, मार्च 4 -- फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहते हैं। सभी एकादशियों में एकमात्र यही ऐसी एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव-पार्वती की भी पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती से विवाह करने के बाद उनका गौना कराकर पहली बार काशी आए थे। उनके आगमन पर काशीवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया और शिव-पार्वती पर रंग-गुलाल उड़ाकर प्रसन्नता व्यक्त की। रंगभरी एकादशी के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष शृंगार करके उन्हें दूल्हे के रूप में सजा कर गाजे-बाजे के साथ नाचते हुए माता पार्वती के साथ उनका गौना कराया जाता है। इसके साथ मां पार्वती पहली बार ससुराल के लिए प्रस्थान करती हैं। इस दिन से ही काशी में रंग खेलने की शुरुआत होती है, जो होली तक चलती है। रंगभरी ए...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.