नई दिल्ली, दिसम्बर 8 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यौन हमला से जुड़े मामलों में असंवेदनशील न्यायिक टिप्पणियों का पीड़िता, उनके परिवार और बड़े पैमाने पर समाज पर 'डरावना असर' पड़ सकता है, ऐसे में इस तरह की टिप्पणियों पर लगाम लगाने के लिए उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों के लिए दिशा-निर्देश बनाने पर विचार कर सकता है। शीर्ष अदालत ने इलाहबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ स्वत: सज्ञान लेकर शुरू की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया गया था कि 'नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना, उसके कपड़े उताड़ने का प्रयास और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है।' मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची क...