नई दिल्ली, जनवरी 15 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा अदालत ने यौन उत्पीड़न और अनाधिकृत प्रवेश के मामले में निचली अदालत से दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों और साक्ष्यों की कमी की ओर भी इशारा किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ट्विंकल वाधवा की अदालत आरोपी समद की अपील पर सुनवाई कर रही थी। समद को अप्रैल 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने दोषी ठहराया था। कड़कड़डूमा अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास, कथित प्रत्यक्षदर्शी का परीक्षण न किया जाना, डेली डायरी (डीडी) एंट्री का रिकॉर्ड और पक्षों के बीच पूर्व शत्रुता जैसे तथ्यों के कारण अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से परे साबित नहीं हो सका। ऐसे में आरोपी को संदेह का ...