नई दिल्ली, फरवरी 18 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली। यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों की सुनवाई के दौरान जजों की असंवेदनशील टिप्पणियों और दृष्टिकोण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए शीर्ष अदालत ने यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाले जजों द्वारा अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को लेकर दिशा-निर्देश बनाने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और एनवी अजारिया की पीठ ने इसके लिए न्यायिक दृष्टिकोण में संवेदनशीलता विकसित करने की जरूरतों पर बल देते हुए भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को दिशा-निर्देश बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने न्यायिक अकादमी को 'यौन अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों के संदर्भ में न्यायाधीशों और न्यायिक प्रक्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.