विधि संवाददाता, फरवरी 24 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह और लिव इन संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग व्यक्तियों को पसंद के साथी के साथ रहने और विवाह करने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समय के साथ समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालता है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 अंतरधार्मिक विवाह पर रोक नहीं लगाता। विवाह पंजीकरण अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह पंजीकरण से इनकार नहीं कर सकते कि संबंधित पक्षों ने धर्मांतरण के लिए जिला प्राधिकारी से पूर्व अनुमति नहीं ली है। अदालत ने कहा कि ऐसी अनुमति अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (डायरेक्टरी) है। इसे अनिवार्य माना जाए तो यह संविधान के अनुच्छेद 14-21 की कसौटी पर खरा न...
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