राजीव गुप्ता, मई 5 -- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक ऐसा मंदिर है, जहां प्रेमी युगल दूर-दूर से आते हैं। साथ जीने और मरने की कसमें खाते हैं। मोहब्बत की निशानी के रूप में यह मंदिर एक फौजी ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था। मंदिर जिले के पिसावां ब्लॉक के फरीदपुर गांव में है, जहां आज भी इस अमर प्रेम की कहानी गूंजती हैं। एक ऐसी प्रेम कहानी, जो शाहजहां और मुमताज की याद दिलाती है। कहानी है भारतीय सेना के जवान रहे रामेश्वर दयाल मिश्रा की। उन्होंने पत्नी आशा देवी की याद में मिसाल पेश करने वाला अनोखा और भव्य मंदिर बनवाया है। फरीदपुर गांव के निवासी रामेश्वर दयाल मिश्र की शादी 1957 में आशा देवी के साथ हुई थी। वो अपनी पत्नी आशा देवी से बेपनाह मोहब्बत करते थे। दोनों का प्रेम इतना गहरा था कि लोग उनकी मिसाल दिया करते थे। 1967 में रामेश्वर सेना में भर्ती...
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