नई दिल्ली, अगस्त 16 -- राष्ट्रपति और राज्यपाल के विधेयकों पर फैसला लेने के लिए समय सीमा तय करने को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम आदेश पर आपत्ति जताई है। इसी साल अप्रैल में दो जजों की बेंच ने कहा था कि राज्यपालों और राष्ट्रपति को विधेयकों पर एक तय समयसीमा के अंदर ही फैसला लेना चाहिए। बेंच ने कहा था कि किसी बिल पर फैसला लेने के लिए राष्ट्रपति को तीन महीने और राज्यपालों को एक महीने से ज्यादा का वक्त नहीं लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कोर्ट दखल दे सकता है। वहीं केंद्र का कहना है कि अगर इस तरह से सुप्रीम कोर्ट दखल देता है तो संवैधानिक अराजकता पैदा हो जाएगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब देते हुए कहा है कि इस तरह की समयसीमा तय करने से संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि आर्...
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