अश्वनी कुमार, फरवरी 18 -- फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ब्रज में सुमुख नाम के गोप और उनकी पत्नी पाटला के यहां माता यशोदा का जन्म हुआ था। भागवत पुराण के अनुसार यशोदा वसु द्रोण की पत्नी धरा का अवतार थीं। धरा बहुत धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। ऐसी मान्यता है कि द्रोण और उनकी पत्नी धरा ने ब्रह्मा की तपस्या की और उनसे यह वरदान मांगा कि जब हम पृथ्वी पर जन्म लें तो हमारी भगवान कृष्ण में निश्छल भक्ति हो और हम पुत्र के रूप में उनका लालन-पालन करें। इसी वरदान के फलस्वरूप यशोदा का जन्म ब्रज में हुआ और वसु द्रोण ने नंद के रूप में गोकुल में जन्म लिया। यशोदा का विवाह नंद के साथ हुआ। समय बीतने के साथ कृष्ण ने राजा शूरसेन के पुत्र वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में जन्म ...
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