नई दिल्ली, नवम्बर 15 -- वह गुलामी का दौर था, पर भारत कटक से अटक तक अखंड था। जितना खूबसूरत उत्कल भूमि का कटक था, उससे कहीं ज्यादा पंजाब का अटक था। अटक की उस दिलकश हरी-भरी बस्ती में अनेक ब्रिटिश परिवार रहते थे। उन्हीं ब्रिटिश परिवारों में एक प्यारा-सा बच्चा हंसी-खुशी बड़ा हो रहा था। उसके पिता भारतीयता का सम्मान करने वाले ईमानदार अधिकारी थे। खैर, वह ऐसा दौर था, जब मोटर वाहन नहीं थे, तो बचपन में ही घुड़सवारी सिखा दी जाती थी। खासकर सेना व प्रशासन से जुड़े लोग या उनके परिवार वाले तो हर हाल में घुड़सवारी सीखते थे कि पता नहीं, कब जरूरत पड़ जाए, तो वह बच्चा भी बहुत हंसते-खिलखिलाते हुए घुड़सवारी सीख रहा था। सब कुछ ठीक ही चल रहा था। देखने से लगता था कि बच्चा जल्दी ही घोड़े पर नियंत्रण सीख जाएगा, पर उस दिन इधर घोड़े वाले की नजर हटी और उधर घोड़ा किसी ...