प्रयागराज, फरवरी 14 -- प्रयागराज। गरुण पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद यमलोक के मार्ग में आने वाली वैतरणी नदी पार करने के लिए गोदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दान तीर्थ पुरोहितों को दिया जाता है। माघ मेला में भी लोग इसी मान्यता के आधार पर संगम स्नान करने आते हैं और गाय, बछिया, बछड़ा तीर्थ पुरोहितों को दान करते हैं। इस साल भी लोगों ने संगम तट पर गोदान किया। दान किए गए गाय, बछिया, बछड़े अब माघ मेला में भटक रहे हैं। यजमानों से दान में मिले गाय, बछिया, बछड़ों को लावारिस छोड़ दिया गया है। संगम क्षेत्र में दर्जनों बछिया-बछड़ा भूखे पेट भटक रहे हैं। माघी पूर्णिमा स्नान पर्व के बाद मेला खाली होने लगा और शिविरों से साधु-संत, कल्पवासी मेला छोड़कर चले गए तो इनको भोजन देने वाला कोई नहीं है। भूखे पेट संगम क्षेत्र में घूम रहीं चार दर्जन गाय, बछिया-बछड़ों...
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