अलीगढ़, जनवरी 7 -- अलीगढ़। वरिष्ठ संवाददाता। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है। यह पंक्तियां शहर में बने रैन बसेरों पर सटीक बैठती हैं। सरकारी दावों में रैन बसेरों में बेशक तमाम सुविधाएं दी जा रही हों लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। रात को कंपकंपाती ठंड से राहत पाने के लिए मुसाफिरों को रैन बसेरा ही सहारा रहता है। जिससे कि ठंड में बाहर नहीं रहना पड़े लेकिन रैनबसेरों में बिना हीटर, अलावा के ठिठुरते हुए ही सो जाना है। फटी रजाई, छलनी कंबल और टूटे फोल्डिंग पलंग के चलते लोग खुले आसमान के नीचे ही रात ही नहीं दिन काटने को भी मजबूर हैं। कठपुला से दीवानी कचहरी की तरफ जाने वाले सड़क पर नगर निगम की ओर महिला-पुरूष के लिए दो रैन बसेरे बनवाए गए हैं। वाटरप्रूफ पंडाल में बने यह रैन बसेरे जितने बाहर से देखने म...