सुपौल, जून 9 -- त्रिवेणीगंज। प्रखंड कृषि पदाधिकारी अरविंद कुमार रवि ने किसानों से मोटे अनाज की खेती करने पर बल दिया है। बताया कि मध्यम और ऊंचाई वाले भूमि के लिए मरुआ, बाजरा, कोदो, चीना फसल सबसे उपयुक्त है। मोटा अनाज करीब तीन माह के बाद फसल तैयार हो जाता है। मोटे अनाज में कैल्सियम, मैग्नीसियम, आयरन सहित अन्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। सरकार मोटे अनाज पर शत-प्रतिशत अनुदान ही नहीं, बल्कि चार हजार प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी देती है।
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