नई दिल्ली, दिसम्बर 18 -- ज्योतिष शास्त्र में अगर कोई ग्रह सबसे ज्यादा रहस्यमय माना गया है, तो वह केतु है। न तो उसका अपना शरीर है, न स्पष्ट रूप है, फिर भी उसका असर जीवन को भीतर तक झकझोर देता है। कहा जाता है कि जहां राहु भोग, लालसा और सांसारिक मोह का प्रतीक है, वहीं केतु त्याग, विरक्ति और मोक्ष की ओर ले जाने वाला ग्रह है। सवाल यह उठता है कि जो ग्रह स्वयं राक्षस योनि से उत्पन्न हुआ, वही मुक्ति का मार्गदर्शक कैसे बन गया? और साल 2026 में केतु की स्थिति क्यों लोगों के लिए जरूरी है, आइए इसे पौराणिक कथा और ज्योतिषीय दृष्टि से समझते हैं।केतु का जन्म और रहस्य पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं में अमृत का वितरण हो रहा था, तब स्वर्भानु नामक दैत्य छल से देवताओं की पंक्ति में बैठ गया और अमृत पी लिया। सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया। भगव...