मेरठ, फरवरी 23 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 15 वें दिन रविवार को सर्वप्रथम मंगलाष्टक सकलीकरण के पश्चात मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ का अभिषेक के साथ शांतिधारा की मांगलिक क्रियाएं की गईं। स्वर्ण कलश से अभिषेक डॉ. सुधीर जैन एवं शांतिधारा रविन जैन, लोकेश जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन दीप्ति जैन, निकिता जैन ने किया। रविवार को विधान पाठ के मध्य आचार्य भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि मानव के आचार विचार के ऊपर ही भारतीय संस्कृति टिकी हुई है। आचरण को प्रत्येक प्राणी सुबह से शाम तक करता है। परंतु आचरण सुचारू एवं सम्यक बनाने के लिए आचार ग्रंथों का स्वाध्याय करना सभी का कर्तव्य है। संसार का प्रत्येक प्राणी अपने जीवन में सुख शांति चाहता है। हमें मोक्ष मार्ग का पथिक बनने के लिए त्याग एवं सं...