प्रयागराज, जनवरी 14 -- प्रयागराज। सनातन धर्म में गुरु-शिष्य की परंपरा संगम की रेती पर और समृद्ध हो रही है। देश के कोने-कोने से माघ मास में कल्पवास और स्नान के लिए आए कल्पवासी और स्नानार्थी अपने-अपने गुरुओं से दीक्षा (गुरु मंत्र) ले रहे हैं। माघ मेले में संत, महात्माओं के अलग-अलग शिविरों में 180 से अधिक शिष्यों ने अपने गुरुओं से दीक्षा ली है। दीक्षा के दौरान गुरु शिष्य पति, पत्नी को विधि विधान से गुरु मंत्र देते हैं जिसका वह पालन करते हैं। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी ब्रह्मश्रम, स्वामी रामास्वामी (शास्त्री स्वामी), स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य, स्वामी अनंताचार्य से कई लोगों ने दीक्षा ली है। स्वामी ब्रह्मश्रम ने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा दीक्षा कार्यक्रम से मजबूत होती है।

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