सोनभद्र, फरवरी 4 -- अनपरा,संवाददाता। मेलों में गांव-शहर, अमीर-गरीब, जाति-धर्म का भेद मिट जाता है। सब एक साथ उत्सव का आनंद लेते हैं। मेलों के माध्यम से लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान, लोकनृत्य और लोकगीत जीवित रहते हैं। यही कारण है कि मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का काम करता है। प्रयागराज का कुंभ मेला, सोनपुर पशु मेला, पुष्कर मेला जैसे आयोजन पूरी दुनिया में भारत की पहचान बन चुके हैं।उक्त उदगार अनपरा रामलीला मैदान में आयोजित हस्तशिल्प कला प्रदर्शनी मेले के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य अतिथि अनपरा परियोजना के सीजीएम इं दूधनाथ यादव ने कहा कि आधुनिक दौर में भी मेले सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी मेल-मिलाप का संदेश देते हैं। उन्होने विधिवत पूजन करने के पश्चात फीता काटकर इसका उद्घाटन किया।मेला आयोजन समिति के संरक्षक अ...
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