संभल, जून 22 -- जनपद में किसानों के लिए कभी नकदी फसल माने जाने वाले मेंथा की खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। बीते वर्षों की तुलना में इस बार मेंथा की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रति बीघा केवल 6 से 7 किलोग्राम मेंथा निकल रहा है, जबकि पहले यही आंकड़ा 9 से 10 किलोग्राम तक पहुंचता था। साथ ही, लागत में बढ़ोतरी और तेल की दर न बढ़ने से किसानों की कमर तोड़ रही है। यही कारण है कि क्षेत्र के अधिकांश किसान अब मेंथा की जगह मक्का की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। जनपद में बीते वर्षों में मेंथा की फसल बड़े पैमाने पर की जाती थी। इसी वजह से संभल को एशिया की सबसे बड़ी मेंथा तेल मंडी के नाम से जाना जाता था। शहर में बड़े पैमाने पर मेंथा तेल का काम होता था। मेंथा की घटती पैदावार व तेल के दाम न बढ़ने की वजह से किसानों का मोहभंग होता जा रहा ह...
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