मुजफ्फरपुर, सितम्बर 27 -- मुजफ्फरपुर। न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले विधि लिपिक कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। मुवक्किलों की जमानत के बांड पेपर भरना, हाजिरी, पेटिशन व अन्य कागजात कोर्ट में पेश करना और दस्तावेज की नकल निकालने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। बावजूद ये उपेक्षित हैं। इनका कहना है कि मुवक्किल, अधिवक्ता व कोर्ट के बीच मजबूत कड़ी के रूप में काम करते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय में लाइसेंस धारी विधि लिपिकों की संख्या लगभग 350 है। इनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनके बैठने की स्थायी व्यवस्था नहीं है। कचहरी परिसर में यत्र-तत्र बैठने की मजबूरी है। संघ कार्यालय जिस भवन में चल रहा है, वह काफी छोटा और जर्जर है। असुविधाओं के बीच बमुश्किल दस लिपिक बैठ सकते हैं। इन्हें प्रतिवर्ष लाइसेंस नवीकरण की चिं...
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