औरैया, फरवरी 20 -- औरैया, संवाददाता। पहले हम लोग स्कूलों के बच्चों की ड्रेस, दूल्हे के कपड़े और नेता जी के कुर्ते पजामा आदि सब कुछ सिलते थे। तब हमारी आमदनी ठीक ठाक थी। लोग हमारे हुनर का सम्मान भी करते थे। लोग मास्टर कह कर पुकारते थे, लेकिन रेडीमेड कपड़ों का व्यापार बाजार में तेजी से फैलने से न अब दूल्हे के कपड़े सिलने के लिए आते हैं न ही बारातियों के आते हैं। नेताजी भी अब कम आते हैं। अब केवल पुराने ख्याल के लोग ही कपड़े सिलवाने हमारे पास आते हैं। ऐसे हालात रहे तो आने वाले समय में हम लोगों का वर्ग विलुप्त होने की कगार पर होगा । आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के साथ दर्जी रामकिशोर, दिनेश कुमार, हरीशंकर, इकरार, मो. सकील, सुरेश. श्याम आदि ने वर्तमान की समस्याओं को साझा करते हुए बताया कि पहले हर कोई नेता से लेकर अफसर तक बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ...
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