वाराणसी, दिसम्बर 14 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मैथिल समाज की ओर से आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ महाकवि विद्यापति महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को नागरी प्रचारिणी सभा में हुआ। महोत्सव में मिथिला की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाने वाली विविध प्रस्तुतियां आयोजित की गईं, वहीं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए चयनित लोगों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक सत्र की शुरुआत दिल्ली से आमंत्रित लोकगायिका डॉ. सुष्मिता झा ने भजन गायन से की। उन्होंने 'कुंज भवन से निकसल रे रोकल गिरधारी', 'ऐ पहुना ऐही मिथिले में रहु न' और 'जोगिया हम एक देखलौं गे माई' जैसी पंक्तियां प्रस्तुत कीं। इसके बाद वरिष्ठ आलोचक डॉ. जितेंद्रनाथ मिश्र ने विद्यापति के गीत 'गे माय चंद्रमुखी सन गौरी हमर' और 'पिया मोर बालक हम तरुनी गे' पाठ किए, जिसमें श्रोता भी पंक्तियां दोह...