पूर्णिया, फरवरी 19 -- जलालगढ़, एक संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ द्वारा ग्राम सांपा रहिका में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से मूंग की खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में किसानों को दलहनी फसल मूंग के वैज्ञानिक उत्पादन, फसल चक्र में इसके महत्व तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार में इसकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। मृदा वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि मूंग एक दलहनी फसल है, जो दैनिक भोजन में लगभग 25 प्रतिशत तक सस्ता एवं सुपाच्य प्रोटीन उपलब्ध कराती है। गरमा मूंग अल्पावधि (60-70 दिन) में तैयार हो जाने के कारण इसे फसल चक्र में आसानी से शामिल किया जा सकता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण द्वारा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है तथा इसे हरी खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है...