गोपालगंज, फरवरी 24 -- कुचायकोट, एक संवाददाता रासायनिक खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरता में गिरावट को देखते हुए किसान अब प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में सीतामढ़ी से आए किसानों का एक जत्था प्राकृतिक खेती की तकनीक और विधियों को समझने के लिए सिपाया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचा। यहां वैज्ञानिकों द्वारा उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई तथा खेतों में इसके व्यावहारिक प्रयोग की विधि समझाई गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार लाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन लंबे स...
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