रामपुर, फरवरी 25 -- रामपुर। माह-ए-रमजान वह मुकद्दस महीना है, जिसमें अल्लाह की नेमतें और बरकतें बरसती हैं। रमजान का चांद नजर आते ही खास इबादत के लिए सफें बिछना शुरू हो जाती हैं। हर कोई अल्लाह की इबादत में मशगूल हो जाता है। इंसान बुराइयों से बचकर अल्लाह से लौ लगाता है, गुनाहों के लिए तौबा करता है। गरीब और मुफलिसों की हमदर्दी और मदद का जज्बा भी इसी महीने खासतौर पर जागता है। ये सभी बातें मुकद्दस रमजान की फजीलत बयां करते हुए नायब इमाम फैजान खां ने कहीं। उन्होंने कहा कि माहे रमजान जश्न-ए-कुरआन का वह पाकीजा महीना है, जिसमें इबादत के जरिए इंसान अपने गुनाहों को अल्लाहताला से मुआफ कराता है। नेकी और इंसानियत के रास्ते पर चलने का एहद करता है। रमजान सब्र और इबादत का वो महीना है जिसमें अल्लाह अपने बंदों का इम्तिहान लेता है। रमजान में अल्लाह की खुसूसी र...
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