प्रयागराज, फरवरी 23 -- प्रयागराज, संवाददाता। माहे-ए-रमजान का पांचवा रोजा और छठवीं तरावीह पूरी हो गई। सोमवार को रोजेदारों ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मौलाना जव्वादुल हैदर रिजवी ने गुस्ल के तौर-तरीके पर प्रकाश डाला। कहा कि आम हालात में नहाना और खास हालात में नहाने में नियत का फर्क है। शरीयत में जो तरीका बताया गया है कि पहले सिर और गर्दन पर पानी डालें। फिर दाहिने बाजू और उसके बाद बाएं बाज़ू। पानी सिर पर या बाज़ू पर डाला गया सभी पानी नीचे बदन और पैरों से होकर जाएगा। इस प्रकार पानी डाला जाए कि जिस्म का कोई भी हिस्सा सूखा न रहे। मोहम्मद अस्करी ने बताया कि रोजा भूख, प्यास, काम के बोझ और ध्यान से भटकने के बीच आत्मनियंत्रण सिखा रहा है। रमजान से अकीदतमंदों की नींद, खाने की आदतों और दिनचर्या में बदलाव भी हुआ है। रमजान नेकदिली, सब्र और नैतिक ताक...