गोरखपुर, फरवरी 11 -- गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता आठ वर्षीय मासूम के रीढ़ की हड्डी में जन्म से ही ट्यूमर बना था। इसका आकार बढ़ने से बच्चे की इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) यानी शरीर की सबसे बड़ी नस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। समस्या से उसके आजीवन अपंग होने या जान जाने का खतरा था। बीआरडी मेडिकल कालेज में पांच डॉक्टरों की टीम ने तीन घंटे सर्जरी कर मासूम को नया जीवन दिया। बिहार के पश्चिम चंपारण की आठ साल की बच्ची के पेट में जन्म से ही एक विशाल ट्यूमर मौजूद था। यह पेट के अंदर रीढ़ की हड्डी से चिपका था। ट्यूमर का आकार बढ़ने से मासूम के पेट का आकार भी बढ़ने लगा। करीब चार साल परिजनों को पहले पेट में सूजन महसूस हुई लेकिन दर्द या परेशानी न होने के कारण इलाज में देर होती चली गई। नवंबर में पेट असामान्य रूप से बढ़ने लगा। तब परिजन बच्ची को लेकर बीआरडी...