अलीगढ़, जनवरी 3 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। दस साल का आकाश अपने दोस्तों की तरह बेफिक्र होकर खेलना चाहता है, मिठाइयों का स्वाद लेना चाहता है, लेकिन हर दिन उसे इंसुलिन की सुई से गुजरना पड़ता है। टिफिन में चॉकलेट-जूस की जगह परहेज है। आकाश अकेला नहीं, वह उन सैकड़ों बच्चों में शामिल है, जिनका बचपन टाइप-1 डायबिटीज की वजह से समय से पहले जिम्मेदारियों में बंध गया है। यह बीमारी सिर्फ शुगर का असंतुलन नहीं, बल्कि मासूम जीवन पर लगती अदृश्य बेड़ियां है। राहत की बात यह है कि अब फिजियोलॉजिकल इंसुलिन पंप जैसी तकनीकें इस पीड़ा को काफी हद तक कम कर रही हैं। पीडियाट्रिक व बच्चों के हार्मोन विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा बताते हैं कि देश में हर साल करीब 20 हजार नए बच्चे टाइप-1 डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। अकेले अलीगढ़ में हर महीने 15-20 नए मामले सामने आते ह...
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