वाराणसी, जनवरी 21 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। मालवा की चंचल बेटी कालांतर में अपने कुशल प्रशासन और धार्मिकता के लिए पूरे भारत में विख्यात हुई। लोकप्रशासन के साथ धर्मस्थलों के पुनर्निमाण की प्रतिबद्धता के लिए काशी ने उन्हें 'लोकमाता' बनाया। मंगलवार को बीएचयू के कृषि शताब्दी सभागार के मंच पर युवा कलाकारों ने महारानी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन संघर्षों को जीवंत किया तो दर्शकगण डेढ़ घंटे के इस नाट्य मंचन में मंत्रबद्ध होकर बैठे रह गए। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त संगठन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) की तरफ से माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर आयोजित 'कर्मयोगिनी माता अहिल्या' नाटक की प्रस्तुति की गई। 90 मिनट के इस नाटक का आरंभ आठ वर्ष की अहिल्या की शिवभक्ति और अपरिचित आगंतुकों के सामने उसके निडर व्यवहार से ह...