वाराणसी, जनवरी 30 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। कुष्ठ रोग को मामूली संक्रमण समझना भारी पड़ रहा है। पांडेयपुर स्थित कुष्ठ रोग केंद्र में पहुंचने वाले करीब 70 फीसदी मरीज शुरुआती लक्षणों को मामूली संक्रमण या एलर्जी समझकर महीनों तक इसकी अनदेखी करते रहे। नतीजा यह कि इलाज में देरी से रोग गंभीर रूप ले लेता है। दिव्यांगता का खतरा भी बढ़ जाता है। पांडेयपुर स्थित कुष्ठ रोग केंद्र में 85 मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 19 शहरी और 66 ग्रामीण क्षेत्र के हैं। डॉक्टरों के अनुसार शरीर पर दाग, सुन्नता या झनझनाहट को छह-छह महीने तक नजरअंदाज करते रहते हैं। कुछ लोग शर्म, संकोच और सामाजिक भय से भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। जब वे इलाज के लिए आते हैं, तब तक रोग बढ़ चुका होता है। हालांकि अब धीरे-धीरे लोग जागरूक हो रहे हैं। इससे रोगियों की संख्या भी कम हो रही है। आकड...