संतकबीरनगर, दिसम्बर 7 -- संतकबीरनगर, निज संवाददाता। सनातन धर्म में मानव जीवन भोग के लिए नहीं बल्कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला है। मनुष्य को इसका सदुपयोग करते हुए परमात्मा की शरण में खुद को लीन करना चाहिए। तभी सांसारिक माया से मुक्ति मिलकर मानव को परमात्मा की प्राप्ति मिल सकती है। भिटहा में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक त्रिभुवन दास जी महाराज ने श्रोताओं को भगवान ब्रह्मा द्वारा श्रृष्टि की रचना का प्रसंग सुनाते हुए कही। कथा व्यास ने कहा कि मानव की श्रृष्टि भगवान ब्रह्मा की भुजाओं से हुई है। दाहिनी भुजा से मनु तो उनकी बाईं भुजा से सतरूपा की उत्पत्ति हुई है। संगीतमय कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ब्रह्मा की विशेष कृपा की बदौलत ही महिलाओं में चंद्रमा जैसी शीतलता तो पुरुषों में सूर्य जैसे तेज का प्रभ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.