अयोध्या, फरवरी 19 -- अयोध्या, संवाददाता। नवनिर्मित देवस्थान 'श्रीरामायण वेला' में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने बालकाण्ड के मंगलाचरण से प्रारंभ करते हुए महर्षि वाल्मीकि की करुणा, तप और दिव्य दृष्टि का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामायण केवल श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि 'मानव के रामत्व की यात्रा' है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन संघर्षों के मध्य भी मर्यादा की अखंड ज्योति जलाए रखने की प्रेरणा देता है। इसके पहले मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने अन्य संतों के साथ दीप प्रज्वलन कर औपचारिक शुभारम्भ किया। हनुमत निवास महंत आचार्य मिथिलेश नन्दिनी शरण ने रामायण को 'आदर्श पारिवारिक जीवन का दर्पण' बताते हुए कहा कि श्रीराम के चरित्र को त्याग, सत्य और कर...