झांसी, जनवरी 20 -- ग्राम कदौरा स्थित रामजानकी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में आस्था उमड़ पड़ी। कथा व्यास सीताशरण दुबे ने कहा कि सच्ची भक्ति का स्वरूप बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता से प्रकट होता है। आचरण ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान है और शुद्ध आचरण से ही भक्ति स्वत: समाज के सामने उजागर होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति का वास्तविक मार्ग आंतरिक साधना, विनम्रता और सदाचरण से होकर गुजरता है। यदि भक्ति का प्रचार अहंकार के साथ किया जाए तो उसका मूल उद्देश्य समाप्त हो जाता है। सच्ची भक्ति में नम्रता, सेवा और संयम का भाव निहित रहता है। वेद, गीता, पुराण एवं संत परंपरा भी यही संदेश देती है कि आत्मशुद्धि के बिना भगवान की अनुभूति संभव नहीं है। वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण के सुधार पर विशे...