मिर्जापुर, जनवरी 30 -- लालगंज। क्षेत्र के तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन सीता विदाई के प्रसंग ने लोगों को भावुक कर दिया। संत बाल योगी संजय महाराज ने जब मिथिला की लाडली की विदाई का वर्णन किया तो पंडाल में मौजूद जनसमूह की आंखें नम हो गईं। कथावाचक ने भावपूर्ण स्वर में कहा कि जब जनक नंदिनी सीता विदा होकर पिता जनक के चरणों में झुकीं तो पूरी मिथिला मौन हो गई। महलों से लेकर गलियों तक केवल करुण विलाप और आंसू ही दिखाई दे रहे थे। उन्होंने विस्तार से बताया कि सीता की विदाई महज एक पारीवारिक घटना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में त्याग, मर्यादा और कर्तव्य का सर्वोच्च उदाहरण है। राजा जनक का संयमित मौन और माता सुनयना की पीड़ा यह दर्शाती है कि बेटी की विदाई पूरे समाज की संवेदनाओं को झकझोर देती है। बाल योगी...