गोरखपुर, जनवरी 1 -- गोरखपुर, निज संवाददाता। माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान और उसके तट पर रहकर तपस्या, स्नान और दान का हिंदू सनातन धर्म में बड़ा महत्व दर्शाया गया है। हालांकि माघ स्नान का क्रम पौष की पूर्णिमा से ही माना जाता है। यह तीन जनवरी को होगी। इसके पहले दो जनवरी को व्रत की पूर्णिमा होगी। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, इस माह में शीतल जल के भीतर डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त होकर स्वर्ग जाते हैं। महाभारत में कहा गया है कि माघ मास को प्रयागराज में 3 करोड़ 10 हजार तीर्थों का समागम होता है। प्रयागराज के अतिरिक्त काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार आदि अन्य पवित्र तीर्थों और बहती हुई नदियों में स्नान का भी बड़ा महत्व है। इस महिने में स्नान सूर्योदय से पूर्व किया जाता है। माघ मास के स्नान से...
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