प्रयागराज, जनवरी 12 -- माघ मेले में वैष्णव अखाड़े की पर्व स्नान की मांग फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने सोमवार रात बैठक कर माघ मेले में किसी भी नई परंपरा को शुरू करने से इनकार कर दिया है। मेला अफसर का तर्क है कि माघ मेला अलग होता है और कुम्भ मेला अलग। दोनों की व्यवस्थाएं अलग होती हैं। ये परंपराएं सदियों से चल रही हैं। इसलिए इसमें कोई नया नियम शुरू नहीं किया जाएगा। महाकुम्भ के प्रचारित होने के बाद वैष्णव अखाड़ों ने इस बार मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर पर्व स्नान करने की अनुमति मांगी थी। इस दौरान अमृत स्नान या फिर शाही स्नान जैसी ही तैयारी थी। जिसमें वैष्णव पंथ के सभी अखाड़े, आचार्य, महामंडलेश्वर और महंतों को अपनी शाही सवारी के साथ शामिल होना था। जिसमें पूरी व्यवस्था महाकुम्भ में अमृत स्नान के जैसी होनी थी। वै...