प्रयागराज, जनवरी 6 -- उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी के तीसरे दिन माघ मेला महात्म्य : एक समेकित शाश्वत चिंतन विषय पर मंथन किया गया। एनसीजेडसीसी के सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के हिन्दी विभाग के प्रो. मार्तण्ड सिंह ने कहा कि माघ मेला हमारी शाश्वत संस्कृति का जीवंत स्वरूप है। संगम तट पर पवित्र भूमि में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक चेतना, जिज्ञासा और भक्ति भाव जागृत हो उठता है। यही सनातन संस्कृति की अभिव्यक्ति है। सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने कहा कि यहां ज्ञान पिपासु सत्य की खोज में आते हैं, जबकि सामान्य जन कल्पवास और पुण्य स्नान के माध्यम से आत्मशुद्धि की कामना करता है। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मनाद कला महोत्सव प्रतियोगिता में काव्...