नई दिल्ली, जनवरी 15 -- माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है। इसे नरक निवारण चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना, जलाभिषेक और उपवास करते हैं। इससे लोगों को नर्क से मुक्ति मिलती है, इसलिए लोग भी पापों से मुक्ति पाने के लिए नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत करते हैं। इस दिन भोलेनाथ से वर मांगते हैं कि हे प्रभु मुझसे जो भी कोई भूल और गलती हुई हो उसे आप क्षमा करें। इस प्रकार क्षमा मांगकर भोलेनाथ का व्रत किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया है कि इस साल मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग क़े हिसाब से 17 जनवरी, शनिवार को यह तिथि पड़ रही है। मिथिला क्षेत्र में नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत हर उम्र वर्ग के लोग करना पसंद करते हैं। मिथिला क्षेत्र में इस व्रत को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रखा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.