चंदौली, मार्च 11 -- चंदौली। मां-बाप की नाफरमानी करने वालों की रोजा और दुकाएं कबूल नहीं होती है। इसलिए मां-बाप की हमेशा सेवा करनी चाहिए। उनका कहना मानना चाहिए। उनसे ऊंची आवाज में बात नहीं करनी चाहिए। जो इंसान अपने मां और बाप को राजी कर लेता है। उससे अल्लाह राजी हो जाता है। वहीं रिश्तेदारों से झगड़ा करने वाले की भी रोजे की कबुलियत नहीं होती है। इससे अपने रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उक्त विचार हाफिज रिजवान साहब ने रमजान माह के नौवं रोजे को व्यक्त किया। उन्होने कहा कि मुकद्दस रमजान माह का यह पहला अशरा रहमत का चल रहा है। कल से यानी ग्यारहवें रोजे से दस दिनों का दूसरा अशरा गुनाहों से माफी का चलेगा। इस अशरे में रोजेदारों को खूब इबादत और कुरान की तिलावत करनी चाहिए। साथ ही ज्यादा से ज्यादा अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। कहा कि चुग...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.