लखीसराय, मई 3 -- बड़हिया, एक संवाददाता। शादी विवाह जैसे मांगलिक अवसरों की इन दिनों भरमार है। गली मोहल्लों में ढोल बैंड बाजे की गूंज और बारातों की चहल पहल से वातावरण उत्सवमय हो उठा है। ऐसे में मल्लिक समाज की अहम भूमिका फिर से केंद्र में आ गई है। एक ऐसी भूमिका जो दिखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मल्लिक समाज, जिसे आमतौर पर सामाजिक ढांचे में निचले पायदान पर रखा गया है। लेकिन यह समाज सदियों से मांगलिक और धार्मिक कार्यों में अपनी अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराता आ रहा है। चाहे विवाह हो, यज्ञ हो या फिर अंतिम संस्कार। इनकी सहभागिता के बिना कोई आयोजन संपूर्ण नहीं माना जाता। यही हमारे पूर्वजों द्वारा रचित वह सामाजिक ताना बाना है। जो समरसता और सौहार्द की नींव को मजबूत करता है। विवाह जैसे आयोजनों मे...
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