नई दिल्ली, जुलाई 18 -- कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2014 में अपनी पत्नी की हत्या के मामले में एक व्यक्ति और दो महिलाओं की मौत की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। न्यायमूर्ति देबांगसू बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निर्देश दिया कि सुरोजीत देब, लिपिका पोद्दार और संजय बिस्वास को तत्काल रिहा किया जाए। देब की अलग रह रही पत्नी जयंती के शव के टुकड़े यहां सियालदाह रेलवे स्टेशन पर एक बिस्तर में मिले थे। पीठ ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि हमारा मानना है कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। पीठ में न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बार रशीदी भी शामिल थे। खंडपीठ ने तीनों व्यक्तियों को दोषी ठहराने और मौत की सजा सुनाने संबंधी फैसला रद्द कर दिया तथा सियालदह सेशन कोर्ट द्वारा उन पर तय किए गए सभी...
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