जमशेदपुर, जनवरी 16 -- आदिवासी बहुल इलाकों में सकरात परब यानी टुसू पर्व पर संताल युवक साड़ी पहनकर गांव गांव नृत्य करने निकल गए हैं। इस पारंपरिक नृत्य को बूढ़ी गड़ी आसेन कहा जाता है। इस खास अवसर पर संताल आदिवासी समाज में इस नृत्य की अनोखी परंपरा है। इसमें युवक महिला का वेश बदलकर नृत्य करते हैं। शुक्रवार को पोंडेहासा, जोंडरगोड़ा, गैताडीह, करनडीह, कीनूडीह, हालुदबनी, शंकरपुर, सोपोडेरा, छोलागोड़ा, तिलकागढ़, जानेगोड़ा, सरजमदा, तुपुडांग, गदडा, रहरगोड़ा में पुरुषों के नृत्य दल घर घर नृत्य करते हुए घूमते रहे। युवक साड़ी पहनकर महिलाओं के वेश में सज धज कर गांवों में घर घर जाकर पारंपरिक बूढ़ी गाड़ी आसेन नामक नृत्य प्रस्तुत करते दिखे। हर साल आदिवासी इलाकों में मकर संक्रांति, यानी सकरात (टुसू पर्व) के मौके पर इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है। इस परम्पर...
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