बाराबंकी, जनवरी 11 -- निन्दूरा। क्षेत्र बलवन्तपुर भानमतिया बाबू दास कुटी पर श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन प्रावचक वेद प्रकाश महाराज द्वारा राजा दशरथ की कथा सुनाई। अयोध्या के चक्रवर्ती महाराजा राजा दशरथ अक्सर जब जंगल में भ्रमण करते थे तो अपनी पत्नी कैकयी को भी साथ ही लेकर जाते थे। इसलिए कई बार युद्ध के दौरान कैकयी राजा दशरथ के साथ होती थी। एक बार की बात है राजा दशरथ और कैकयी वन की ओर निकले। जहां उनका सामना बाली से हो हुआ। इस दौरान बाली ने राजा दशरथ को युद्ध के लिए ललकार दिया। जोश में आकर राजा दशरथ ने युद्ध की चुनौती को स्वीकार कर लिया। परंतु वो ये भूल गए कि बाली को वरदान प्राप्त था कि जिस किसी पर भी बाली की दृष्टि पड़ेगी उसकी आधी शक्ति बाली के अंदर आ जाएगी। अत: यह तो निश्चित था कि राजा दशरथ और बाली के बीच में से जीत बाली की होगी और हुआ भी ...
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