उज्जैन, जनवरी 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में भेदभाव का आरोप लगाने वाली उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने और सभी के लिए बराबर अवसर की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिका दायर करने वाले असली श्रद्धालु नहीं होते हैं, बल्कि उनका उद्देश्य कुछ और होता है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि ऐसे विषयों पर गाइडलाइंस या नीति बनाना उसका काम नहीं है। दर्पन अवस्थी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिका लगाने वाले असली श्रद्धालु नहीं होते। सीजेआई ने कहा, 'वे श्रद्धालु नहीं है। हम आगे इस पर बोलना नहीं चाहते हैं। इन लोगों का उद्देश्य कुछ और होता है। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह फैसला करने का ...