बागपत, सितम्बर 11 -- महंगाई का असर पितृ पक्ष में दिख रहा है। देशी घी की महंगी इमरती के स्थान पर अब वनस्पति घी से तैयार मिठाइयां परोसी जा रही हैं। पूरियों को तलने के लिए भी विकल्प खोजे जा रहे हैं। महंगी सब्जियों ने थाली में व्यंजनों की संख्या को कम करवा दिया है। इतना ही नहीं दूध के बढ़े दाम ने खीर की गुणवत्ता भी प्रभावित कर दी है। कटौती तो मजबूरी है, क्वालिटी का भरोसा नहीं, फिर भी देशी घी के दाम 650 रुपये किलो से अधिक हैं। देशी घी की एक इमरती का नग 21 रुपये का पड़ रहा है। थाली में एक इमरती तो रखी नहीं जाएगी। कोई भी देशी घी की मिठाई लाओ, दाम 500 रुपये किलो से कम नहीं है जबकि अन्य विकल्पों से बनी मिठाई भी 350 रुपये किलो बिक रही है। कारोबारी नीरज जैन ने बताया कि पहली बार सब्जियों के दाम सुन कर झटका लग रहा है। मूली 30 रुपये किलो में मिल रही। टमा...
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