नई दिल्ली, जुलाई 15 -- Inflation Vs EMI: थोक और खुदरा महंगाई में आई रिकॉर्ड गिरावट ने आरबीआई के लिए ब्याज दरों में एक और कटौती का आधार तैयार कर दिया है। खासकर खाद्य महंगाई दर के शून्य से नीचे जाने से इसकी संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लगातार 5वां महीना है, जब खुदरा महंगाई दर आरबीआई के 4 प्रतिशत के तय दायरे से नीचे बनी हुई है। इसे देखते हुए अगस्त या अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक में रेपो रेट में कटौती का फैसला लिया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो होम लोन से लेकर ऑटो लोन तक सस्ते होंगे। पहले से चल रही ईएमआई भी कम होगी। देश की खुदरा महंगाई दर घटकर जून में 2.1% रह गई। यह पिछले पांच वर्षों में यह खुदरा महंगाई में लगातार गिरावट की सबसे लंबी शृंखला है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई के चार फीसदी के आसपा...
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