बिहारशरीफ, जनवरी 7 -- आएं अपनी नदी बचाएं: मवेशियों का साथ छोड़ रहीं सूखी नदियां, बाल्टी के पानी से तर हो रहे कंठ नदियां सूखी तो खत्म हो गया हरा चारा, महंगे भूसे और पशु आहार पर निर्भर किसान कभी पशुओं का प्राकृतिक स्वीमिंग पुल हुआ करती थीं नदियां, अब नहाने के भी पानी नहीं गंदे पोखर और गड्ढों का पानी पीने की मजबूरी, बीमारियों की चपेट में आ रहे दुधारू पशु फोटो नदी : सूखी पड़ी पैमार नदीं। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। पानी लबालब नदियां कभी गांवों की लाइफलाइन हुआ करती थीं। सुबह-शाम मवेशियों के गले की घंटियों की आवाज और नदी में उनकी जलक्रीड़ा अब बीते जमाने की बात हो गई है। अतिक्रमण और गाद के कारण छोटी नदियों का वजूद मिटने से पशुपालकों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। हालात यह हैं कि पंचाने, मुहाने, पैमार, लोकाइन, जिरायन, नोनाई, नरहना आदि नदियों म...
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