नई दिल्ली, जून 19 -- माजा दारूवाला,मुख्य संपादक, इंडिया जस्टिस रिपोर्ट अपने देश में एक सच्चाई को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह सच्चाई हाल ही में विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक लैंगिक विषमता रिपोर्ट के आंकड़ों से निकलकर सामने आई है। इस रिपोर्ट में भारत को 148 देशों की सूची में 131वें स्थान पर रखा गया है। लैंगिक समानता के लिहाज से यह ब्रिक्स देशों और दक्षिण एशिया के अपने ज्यादातर पड़ोसियों से भी पीछे है। यह पिछड़ापन इसलिए नहीं है कि भारत में लैंगिक बराबरी के खिलाफ काम हो रहा है, बल्कि इसलिए है कि अन्य देशों में इस विषमता की खाई को तेजी से पाटा जा रहा है। साफ है, भारत को अगर तरक्की करनी है, तो महिलाओं को बराबरी के स्तर पर लाना जरूरी होगा। इस मामले में अच्छी और बुरी, दोनों तरह की खबरें हैं। अच्छी खबर यह है कि शिक्षा और सियासत के क्षेत्र में...