मुजफ्फर नगर, नवम्बर 13 -- तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित हनुमत धाम में ब्रह्मलीन स्वामी रामधारी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन अमृत ज्ञान की वर्षा करते हुए वृंदावन श्री धाम से पधारे विश्व विख्यात कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने किसी की निंदा करने में समय को नष्ट नहीं करना चाहिए बल्कि मन को प्रभु के ध्यान में लगाना चाहिए। ठाकुर जी के चरणों में ही परम शांति और मुक्ति मिलती है। मन के बारे में महाराज ने बताया कि जैसे मछली को जल से निकाल दो तो वह जल के बिना छटपटाने लगती है, वैसे ही मन भी यदि श्री बिहारी जी के चरणों से हट जाये तो उनके लिये भी छटपटाहट होनी चाहिए। जब वक्ता कथा कहने के लिए और भक्त कथा सुनने के लिए बैठता है तो कथा के दौरान कथा व्यास और श्रोतागण दोनों ही कृष्ण स्वरूप हो जा...