मुंगेर, जुलाई 9 -- मुंगेर, हिन्दुस्तान संवाददाता। गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम के तहत मुंगेर योगाश्रम के संन्यास पीठ पादुका दर्शन में चल रहे भजन-कीर्तन व प्रवचन के तीसरे दिन मंगलवार को परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने सदगुरु गायत्री पर अपनी व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमारे मन की कलुषता और मन के विकार ही हमें इस संसार में बांधे हुए है। शिवत्व हमें इस बंधन से मुक्त करता है। सदगुरु गायत्री के दूसरे भाग सत्यानन्दाय धीमहि का अर्थ है, कि मैं उन सभी के प्रति सजग बनूं जो सत्य है निश्छल है और जो वास्तविक है। स्वामी जी ने कहा कि सत्य के साक्षात्कार से ही मन के सारे आभाव भस्म हो जाते हैं। मन के सारे विकार समाप्त हो जाते हैं। और यह साक्षात्कार सेवा, प्रेम और दान के द्वारा संभव है। उन्होंने कहा कि जब हम अच्छा बनने और करने का प्रयास करेंगे तब हम ...
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