मेरठ, फरवरी 14 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के छठवें दिन शुक्रवार को सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया। साथ ही शांतिधारा की मांगलिक क्रियाएं मंत्रोच्चारण पूर्वक की गई। विधान के छठे दिन 151 परिवारों की ओर विधान एवं पाठ किया गया। मुनि भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि मन की शांति सबसे बड़ी संपदा और अशांति सबसे बड़ी दरिद्रता है। जीवन में शांति है तो यह जीवन स्वर्ग के समान है, नहीं तो नरक के समान होता है। जीवन में शांति है तो साधन के अभाव में भी आनंद होता है और अशांति में साधन होने के बाद भी जीवन व्यर्थ रहता है। दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जिसे शांति नहीं चाहिए। विधान में भगवान की शांतिधारा आशीष जैन,, संयम जैन एवं स्वर्ण कलश से अभिषेक अर्पित जैन ने किया। वहीं, दीप प्रज्ज्वलन ...